Uttarkashi Cloudburst: टूटती उम्मीदों के बीच सेना की दस्तक !
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Uttarkashi Cloudburst: टूटती उम्मीदों के बीच सेना की दस्तक !

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Uttarkashi Cloudburst: टूटती उम्मीदों के बीच सेना की दस्तक, 150 जवान तैनात; ड्रोन, डॉग और मशीनें भी मैदान में

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हुई विनाशकारी बादल फट की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस प्राकृतिक आपदा ने कई परिवारों की खुशियों को उजाड़ दिया है, जबकि राहत और बचाव कार्य दिन-रात जारी है। टूटती उम्मीदों के बीच भारतीय सेना और राहत दलों की दस्तक लोगों के लिए एक नई किरण बनकर आई है। उत्तरकाशी के प्रभावित इलाकों में 150 जवानों की विशेष टुकड़ी तैनात की गई है। इसके अलावा ड्रोन, खोजी कुत्ते (डॉग स्क्वॉड), और हाई-टेक मशीनों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

त्रासदी का मंजर: जब प्रकृति ने दिखाई विकरालता

Uttarkashi Cloudburst 2025 की यह घटना 3 अगस्त की रात को हुई जब अचानक बादलों का फटना शुरू हुआ। भारी बारिश और तेज बहाव ने गाड़ियों, घरों और खेतों को अपनी चपेट में ले लिया। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है और दर्जनों लोग अब भी लापता हैं। स्थानीय प्रशासन ने प्रारंभिक तौर पर 12 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है, लेकिन यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

सेना का मोर्चा संभालना बना राहत की उम्मीद

जैसे ही हालात बिगड़ते गए, Indian Army disaster relief टीम ने मोर्चा संभाला। उत्तरकाशी में राहत और बचाव कार्य के लिए सेना की एक विशेष यूनिट को तैनात किया गया है जिसमें 150 प्रशिक्षित जवान शामिल हैं। इन जवानों के पास अत्याधुनिक उपकरण और विशेष आपदा राहत ट्रेनिंग है जिससे राहत कार्यों में तेजी लाई जा रही है।

Drone search and rescue Uttarkashi ऑपरेशन भी शुरू हो चुका है, जिसमें हाई-रिज़ॉल्यूशन ड्रोन कैमरे का उपयोग किया जा रहा है। यह ड्रोन पहाड़ों और नदी के बहाव क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।

खोजी कुत्ते और मशीनों की मदद से राहत कार्य तेज

सेना और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें अब खोजी कुत्तों (डॉग स्क्वॉड) के जरिए मलबे के नीचे दबे लोगों को ढूंढ़ रही हैं। इन डॉग स्क्वॉड की मदद से अब तक दो लोगों को जिंदा मलबे से बाहर निकाला गया है।

इसके साथ ही, भारी मलबा हटाने के लिए विशेष JCB और अन्य भारी मशीनें लाई गई हैं। नदी और पहाड़ों से आए मलबे को हटाने में मशीनरी की अहम भूमिका निभाई जा रही है, जिससे लापता लोगों तक पहुंचने में मदद मिल रही है।

हेलिकॉप्टर और मेडिकल टीमें भी एक्टिव

उत्तराखंड सरकार की पहल पर एयरलिफ्ट के लिए हेलिकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं। गंभीर रूप से घायल लोगों को देहरादून और ऋषिकेश के बड़े अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है। साथ ही मोबाइल मेडिकल यूनिट्स भी प्रभावित गांवों में पहुंचाई गई हैं ताकि प्राथमिक उपचार तुरंत मिल सके।

Uttarakashi flood rescue में शामिल सभी मेडिकल टीमें लगातार काम कर रही हैं ताकि घायलों को समय पर इलाज मिल सके और संक्रमण का खतरा टाला जा सके।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील

घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि राहत कार्य प्राथमिकता है। उन्होंने सेना, NDRF और SDRF को हरसंभव सहायता देने का निर्देश दिया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हालात की निगरानी के लिए एक वॉर रूम बनाया है और प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण भी किया। उन्होंने कहा, “लोगों की जान बचाना हमारी पहली प्राथमिकता है। जो भी संसाधन चाहिए होंगे, हम तुरंत उपलब्ध कराएंगे।”

सामाजिक संगठनों की भागीदारी

इस संकट की घड़ी में कई सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने भी सहायता के हाथ बढ़ाए हैं। स्थानीय गुरुद्वारों और मंदिरों में राहत शिविर बनाए गए हैं जहाँ प्रभावितों को भोजन, वस्त्र और रहने की सुविधा दी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी #UttarkashiRelief अभियान के तहत मदद इकट्ठा की जा रही है।

अब आगे क्या?

इस तरह की natural disaster news India के बाद सबसे अहम सवाल यह उठता है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से कैसे निपटा जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तरकाशी और उत्तराखंड के अन्य पर्वतीय क्षेत्र भूस्खलन और बादल फट जैसी आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से इन घटनाओं की संख्या में इजाफा हो रहा है।

सरकार को चाहिए कि वह इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाए, जिसमें early warning systems, बेहतर सड़क व संचार प्रणाली और स्थायी पुनर्वास नीति शामिल हो।

निष्कर्ष

Uttarkashi cloudburst 2025 एक बार फिर यह बता गया कि प्रकृति के सामने हम कितने असहाय हैं। लेकिन इस आपदा में सेना, राहत एजेंसियों और स्थानीय लोगों के जज्बे ने उम्मीद की किरण जगाई है। यदि इस तरह के संकटों से समय रहते सीखा जाए, तो भविष्य में कई जानें बचाई जा सकती हैं।

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