Himachal Cloud Burst: हिमाचल में बादल फटने से तबाही! अचानक आई बाढ़ में दो की मौत, 20 लापता – रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
हिमाचल प्रदेश के चंबा और कुल्लू जिलों में गुरुवार तड़के बादल फटने की भीषण घटना ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। अचानक आई बाढ़ ने कई घरों को बहा दिया, सड़कें टूटीं और दर्जनों वाहन मलबे में दब गए। इस हादसे में अब तक 2 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र
इस प्राकृतिक आपदा से चंबा, कुल्लू, और मनाली क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। चंबा के तिस्सी इलाके में सुबह 4 बजे के करीब बादल फटा, जिसके बाद तेज़ बहाव के साथ पानी और मलबा गांवों की ओर बढ़ गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कई मकानों में लोग सो रहे थे, जब अचानक ज़मीन धंसने और पानी के शोर से सब जागे। बहुत से लोग समय रहते बाहर नहीं निकल पाए।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर तैनात की गई हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और कई जगहों पर फंसे लोगों को निकाला गया है।

हिमाचल सरकार ने लापता लोगों की खोज के लिए ड्रोन सर्विलांस भी शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने स्थिति का जायजा लेने के लिए उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है।
“हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सभी को सुरक्षित निकाला जाए। लापता लोगों की तलाश युद्धस्तर पर जारी है।”
– मुख्यमंत्री कार्यालय
सड़कों और पुलों को भारी नुकसान
बादल फटने के कारण राज्य की कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं।
मनाली-लेह हाईवे, कुल्लू-शिमला मार्ग, और अन्य लोकल संपर्क मार्गों पर आवाजाही बंद कर दी गई है।
करीब 15 पुल और छोटे पुलिया पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा मरम्मत कार्य शुरू किया गया है, लेकिन लगातार बारिश से काम में देरी हो रही है।
पर्यटकों को जारी की गई चेतावनी
हिमाचल पर्यटन विभाग ने राज्य में यात्रा कर रहे पर्यटकों से अपील की है कि वे किसी भी पहाड़ी इलाके में जाने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
मनाली और धर्मशाला में फंसे सैकड़ों पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। होटलों और होमस्टे को निर्देश दिए गए हैं कि वे मेहमानों को बाहर जाने की अनुमति न दें।
क्यों होती हैं बादल फटने की घटनाएं?
बादल फटना यानी Cloud Burst एक स्थानीयकृत और तीव्र वर्षा की घटना होती है, जिसमें कम समय में भारी मात्रा में पानी गिरता है। आमतौर पर यह तब होता है जब नमी से भरे बादल पहाड़ों से टकराकर वहीं फंस जाते हैं और अधिक पानी छोड़ते हैं।
जलवायु परिवर्तन और अनियोजित निर्माण कार्यों के कारण ऐसी घटनाएं अब और अधिक बार देखने को मिल रही हैं, खासकर हिमालयी राज्यों में।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी रवि ठाकुर ने बताया,
“इतनी तेज़ बारिश और अचानक बहाव पहले कभी नहीं देखा। हमारी ज़िंदगी भर की कमाई मलबे में दब गई। प्रशासन से मदद की उम्मीद है।”
स्कूल-कॉलेज बंद, अलर्ट जारी
हिमाचल सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सभी स्कूल-कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है और नागरिकों से अपील की है कि वे नदी-नालों के पास न जाएं।
आगे की स्थिति
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में और बारिश की चेतावनी दी है। विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी नई घटना की तत्काल जानकारी मिल सके। राहत शिविर स्थापित किए जा रहे हैं, और प्रभावित लोगों के लिए मुफ्त भोजन एवं दवाइयों की व्यवस्था की जा रही है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहना और समय पर आपदा प्रबंधन बेहद ज़रूरी है। प्रशासन की तत्परता और नागरिकों की सजगता मिलकर ही ऐसे संकटों से पार पा सकती है।








