Himachal Flood: बाढ़ में 6 जगह फोरलेन का नामोनिशान मिटा, टोल प्लाजा पर बह रही ब्यास; कब खुलेगा मनाली हाईवे?
हिमाचल प्रदेश इन दिनों बाढ़ की भीषण त्रासदी से जूझ रहा है। मानसून की भारी बारिश के चलते ब्यास नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। इसका सबसे बड़ा असर चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे (NH-3) और फोरलेन प्रोजेक्ट पर देखने को मिला। बाढ़ ने जहां कई पुल, सड़कें और मकान तबाह कर दिए, वहीं छह जगहों पर फोरलेन पूरी तरह बह गया है। यहां तक कि टोल प्लाजा भी ब्यास नदी के तेज बहाव में डूब गया है। ऐसे हालात में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मनाली हाईवे कब खुलेगा?
फोरलेन पर बाढ़ का कहर
हिमाचल प्रदेश में बने फोरलेन प्रोजेक्ट को देश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों में गिना जाता है। यह न केवल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल मनाली को चंडीगढ़ और दिल्ली से जोड़ता है, बल्कि लाहौल-स्पीति और लेह-लद्दाख तक पहुंचने का भी मुख्य मार्ग है।
लेकिन इस बार की बाढ़ और लैंडस्लाइड ने फोरलेन को 6 जगहों पर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। कई किलोमीटर तक सड़कें टूटकर ब्यास नदी में समा गईं। लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई (NHAI) की टीमें मौके पर जुटी हुई हैं, लेकिन पानी का दबाव इतना ज्यादा है कि मरम्मत कार्य में समय लगना तय है।

पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ीं
मनाली और कुल्लू हर साल लाखों पर्यटकों का पसंदीदा स्थल रहते हैं। अभी गर्मियों के मौसम में यहां पर्यटकों की संख्या और भी ज्यादा रहती है। लेकिन बाढ़ और हाईवे बंद होने से हजारों पर्यटक फंसे हुए हैं।
होटल व्यवसायियों और ट्रैवल एजेंट्स का कहना है कि पर्यटन पूरी तरह ठप हो गया है। मनाली, कसोल, मनिकरण और अटल टनल तक जाने का रास्ता बंद है। टूरिज्म इंडस्ट्री को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
प्रशासन की चुनौतियां
हिमाचल सरकार और जिला प्रशासन ने बचाव और राहत कार्य तेज कर दिए हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमें मौके पर तैनात हैं। हेलिकॉप्टर के जरिए फंसे लोगों को निकाला जा रहा है।
हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती मनाली हाईवे को बहाल करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे की मरम्मत में कम से कम 15 से 20 दिन का समय लग सकता है। कई जगहों पर सड़क पूरी तरह बह चुकी है, जिसके लिए नए निर्माण की जरूरत होगी।
बाढ़ से नुकसान का अनुमान
अभी तक के आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में बाढ़ से हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है। सैकड़ों मकान, पुल और सड़कें टूट चुकी हैं। ब्यास नदी के किनारे बसे गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
कुल्लू, मंडी और मनाली में हालात बेहद खराब हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी इतना बड़ा जल प्रलय नहीं देखा।
मनाली हाईवे कब खुलेगा?
सरकारी अधिकारियों ने साफ कहा है कि स्थिति सामान्य होने और पानी का स्तर घटने के बाद ही मनाली हाईवे की बहाली का काम तेजी से शुरू किया जाएगा।
फिलहाल प्रशासन का ध्यान बचाव और राहत कार्यों पर है। इसके बाद फोरलेन और हाईवे को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अगर मौसम सामान्य रहा तो आने वाले 2 से 3 हफ्तों में मनाली हाईवे आंशिक रूप से खुल सकता है।
भविष्य के लिए सबक
यह बाढ़ हिमाचल के लिए बड़ा सबक है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में अनियंत्रित निर्माण कार्य, अवैज्ञानिक खनन और नदियों के किनारे बढ़ते अतिक्रमण ने आपदा को और भयावह बना दिया।
जरूरत इस बात की है कि आने वाले समय में योजनाएं बनाते समय पर्यावरणीय पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि इस तरह की तबाही को रोका जा सके।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश इस समय भीषण बाढ़ और आपदा की चपेट में है। ब्यास नदी के उफान ने फोरलेन प्रोजेक्ट और मनाली हाईवे को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि मनाली हाईवे कब तक बहाल हो पाएगा।
सरकार और प्रशासन लगातार काम में जुटे हुए हैं, लेकिन मरम्मत में समय लगना तय है। ऐसे में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को थोड़े धैर्य की जरूरत है।