भारत-पाकिस्तान मैच पर भड़का पहलगाम हमले का पीड़ित परिवार !
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भारत-पाकिस्तान मैच पर भड़का पहलगाम हमले का पीड़ित परिवार !

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‘बेकार गया ऑपरेशन सिंदूर…’: एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच पर भड़का पहलगाम हमले का पीड़ित परिवार, PM मोदी से पूछा ये सवाल

India vs Pakistan Match: भारत और पाकिस्तान के बीच खेले जाने वाले किसी भी क्रिकेट मैच को लेकर हमेशा ही जबरदस्त उत्साह रहता है। एशिया कप 2025 का भारत-पाकिस्तान मुकाबला भी इसी वजह से सुर्खियों में है। लेकिन इस बीच, पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवार ने इस मैच को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया है। परिवार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंक को बढ़ावा देता रहेगा, तब तक उसके साथ किसी भी तरह का खेल या सांस्कृतिक आदान-प्रदान पूरी तरह से बेकार है।

पहलगाम हमले की यादें अभी भी ताजा

पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देशभर को हिला दिया था। इस हमले में निर्दोष नागरिकों ने अपनी जान गंवाई थी और कई परिवार आज भी उस दर्द को झेल रहे हैं। पीड़ित परिवार ने भारत-पाकिस्तान मैच पर सवाल उठाते हुए कहा कि – “क्या बेकार गया ऑपरेशन सिंदूर? क्या शहीदों की कुर्बानियों की कोई कीमत नहीं है?”

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उनका कहना है कि जब एक तरफ पाकिस्तान की सरज़मीं से लगातार आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है, वहीं दूसरी तरफ भारत का उसके साथ क्रिकेट खेलना सही संदेश नहीं देता।

एशिया कप का हाई-वोल्टेज मैच और विवाद

भारत-पाकिस्तान मैच एशिया कप का सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है। स्टेडियम खचाखच भरे होते हैं, लाखों लोग टीवी और मोबाइल स्क्रीन पर मैच देखते हैं, और दोनों देशों के खिलाड़ियों पर जबरदस्त दबाव रहता है। लेकिन इस बार यह मुकाबला सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहा। पीड़ित परिवार का कहना है कि क्रिकेट जैसे बड़े मंच पर पाकिस्तान को जगह देना भारत की सुरक्षा नीतियों के खिलाफ है।

पीएम मोदी से उठाए बड़े सवाल

हमले के पीड़ित परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सवाल किए हैं। परिवार का कहना है –

  • “क्या पाकिस्तान के खिलाफ सख्त एक्शन सिर्फ भाषणों तक सीमित रहेगा?”
  • “क्या आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के साथ खेल संबंध रखना सही है?”
  • “क्या हम अपने शहीदों की शहादत को भूल गए हैं?”

इन सवालों ने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर भी कई लोग इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं। कुछ लोग मानते हैं कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए, जबकि कई लोग इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के साथ खेलना सही नहीं।

खेल और राजनीति – हमेशा से जुड़ा रहा सवाल

भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले हमेशा से राजनीति और कूटनीति से जुड़े रहे हैं। 2008 के मुंबई हमलों के बाद लंबे समय तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज बंद हो गई थी। केवल आईसीसी टूर्नामेंट और एशिया कप में ही टीमें आमने-सामने आती हैं।

अब जब एशिया कप 2025 में दोनों टीमें भिड़ रही हैं, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या ऐसे मैचों से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ावा नहीं मिलता?

पीड़ित परिवार का दर्द – शहादत को न भूलें

पीड़ित परिवार का कहना है कि खेल और संस्कृति का आदान-प्रदान तभी संभव है जब दोनों देशों के बीच विश्वास का रिश्ता हो। लेकिन जब तक पाकिस्तान की धरती से आतंकवाद खत्म नहीं होता, तब तक किसी भी तरह का खेल आयोजन शहीदों की कुर्बानी का अपमान है।

परिवार ने यह भी कहा कि सरकार को सिर्फ बयानबाजी नहीं करनी चाहिए, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस

भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर सोशल मीडिया पर खूब प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।

  • कुछ लोग कहते हैं कि क्रिकेट सिर्फ खेल है और इसे राजनीति या आतंकवाद से जोड़ना ठीक नहीं।
  • दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि पीड़ित परिवार की आवाज सही है और जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को रोकता नहीं, तब तक उसके साथ खेलना ही नहीं चाहिए।

यह बहस धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी ले रही है, क्योंकि विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग सकते हैं।

भारत-पाक क्रिकेट का भविष्य

भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच हमेशा ही विवादों से घिरे रहते हैं। आईसीसी और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के दबाव में भारत को कभी-कभी पाकिस्तान से खेलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। लेकिन घरेलू स्तर पर इसके खिलाफ आवाज उठना यह दिखाता है कि आम जनता और शहीद परिवार अब सिर्फ जीत-हार से आगे सोच रहे हैं।

अगर सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती, तो भविष्य में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट पर और भी सख्त फैसले देखने को मिल सकते हैं।

निष्कर्ष

एशिया कप 2025 का भारत-पाकिस्तान मैच जहां क्रिकेट प्रेमियों के लिए रोमांचक है, वहीं पहलगाम हमले के पीड़ित परिवार के लिए यह भावनाओं को झकझोरने वाला है। उनका कहना है कि “ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों और शहीदों की शहादत बेकार नहीं जानी चाहिए।”

इस बहस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सिर्फ मैदान का खेल नहीं, बल्कि राजनीति, सुरक्षा और शहीदों की कुर्बानी से जुड़ा हुआ है।


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